Sunday, March 8, 2009
नारी दिवस पर विशेष...........?
Saturday, January 24, 2009
अरे भाई ये सुभाष चंद्र बोस कौन है...........!
कुछ लोग कहते हैं की फैजाबाद में गुमनामी बाबा की समाधी उन्ही की है सो हम भी आज के दिन कुछ पलों के लिए वहां चहेल कदमी कर आए और लगे हाथ कुछ बात चीत भी कर ली गुमनामी बाबा से लेकिन बाबा जी ने मुझे कोई जवाब नही दिया हाँ वापसी पर अलबत उस समाधी से आवाज़ आई की अबे नालायक तू क्यों मेरी चिंता में घुला जा रहा है जब मेरे देश ने ही मुझे भुला दिया तो तू तो अभी ठीक से देशवासी भी नही हो पाया है ! जा पहले इन तथा कथित देश भक्तों से नेताओं से देशवासी होने का पहचान पत्र ले कर आ फ़िर मुझसे बात करना और हाँ रात के अंधेरे में ही आना नही तो तेरा भी सौदा कर दिया जाएगा और फ़िर तुझे भी मरने से पहले यूँ ही गुमनामी की ज़िन्दगी बितानी होगी और मरने के बाद भी सरकार ही घोषित करेगी की तू है कौन और वो भी १००-२०० सालों की जाँच करने के बाद.........,,ये वो नेता जी थे जिनको शायद हम सभी भुला चुके हैं और चिरकुट सरकारी मदद लेने वाले क्रांतिकारियों से भी गया गुजरा समझते हैं.....................,,,,,,,,,,,,
Saturday, December 27, 2008
[फिर शहीद हुवे]29/11/08
अनाथ बच्चे बिलखते
माँ बाप खाली दामन तकते,
फिर कोई फूल चमन से
फिर चमन किसी फूल से
आज महरूम हो गया है ,
फिर पड़ी दरारें आपस में
फिर किसी ने उगला ज़हर है,
फिर खेली गयी होली खून की
फिर शहीद हुवे
भगत चंद्रशेखर अशफाक ,
रोको इन दह्शद-गर्दों को
ये देश की अंधी राजनीति के
पेट से पैदा कुछ कीड़े हैं,
देश बेचने वालों के
ये अन्न दाता हैं
जागो भारत की अब
हम टूटने की कगार पर हैं ,
एक क्रांति और पुकार रही है
सुनो इस पुकार को
आज़ाद करा लो देश
आओ एक बार फिर से
हम सिर्फ क्रांतिकारी बने
एक बार फिर से हम
देश में बदलाव के लिए संघर्ष करें......,
apka हमवतन भाई गुफरान(AWADH PEPULS FORUM FAIZABAD)
Thursday, November 27, 2008
अवध पीपुल्स फोरम..
Monday, November 17, 2008
मेरा बचपन.....
मेरा बचपन
फुटपाथों पर गुब्बारे बेचता मेरा बचपन,
भूख मिटने को भीख मांगता मेरा बचपन,
सड़कों पर फिरता करता बूट्पोलिश मेरा बचपन,
कूड़े के ढेरों पर कबाड़ उठता मेरा बचपन,
साहूकारों के गोदामों में बोझ उठता मेरा बचपन,
सेठों के घरों में झाडू पोंछा करता मेरा बचपन,
रातों को रोता रहता भूखा सोता मेरा बचपन,
टूटे पत्तों जैसा हवा में उड़ता मेरा बचपन,
इक रात जो सोया जाने कहाँ खो गया मेरा बचपन,
आंख खुली तो देखा मैंने बीत चूका था मेरा जीवन...
Sunday, November 16, 2008
हम समाज को बदल सकते हैं....
आदरणीय ,
आज हम जो हालत अपने आस-पास महसूस कर रहे हैं,उसमे सभी प्रकार की मानवीय संवेदनाओं का बहोत तेजी के साथ घटती जा रहीं हैं रोजगार के तमाम पहलुओं पर हमारे सामने प्रश्न चिन्ह लगा हुवा है जो बुनियादी ज़रूरतें हमको अपनी ज़िन्दगी गुजर बसर करने के लिए चाहिए वह नदारत है सत्ता के लोभी बम रुपी दानव की गोद में बैठकर हम पर अपने अस्तित्व को थोपने का प्रयास लगातार कर रहे हैं इन्ही सभी सवालों पर हम सभी लोगों ने कई बार आपसे बात चीत की और तय किया की हम सब मिलकर समाज के तमाम पहलुओं पर लगातार वार्तालाप करेंगे, ताकि समाज के तमाम पहलुओं को भली भांति समझ कर, मिलकर काम करने वाली संस्कृति को बढावा देते हुवे रचनामक नज़रिए के साथ आगे बढा जाय इसी कड़ी में हमने आपसी बात-चीत "अवध पीपुल्स फोरम" के नाम से करना शुरू की है फोरम की ओर से प्रेस क्लब सिविल लाइन फैजाबाद में 17 नवम्बर 2008 को सुबह 09:00 बजे से 05:००
बजे शाम तक आपसी बैठक काम आयोजन किया है l हम अपने संगठन की ओर से आप को आमंत्रित करते हैं की आप 11:00 बजे से 01:00 बजे तक बैठक में शामिल हो सकते हों नवजवानों को किसी तरह से अपने उत्तर दायित्व को समझते हुए शहर me काम करने की शुरुआत करनी चाहिए राय दें हमारा यह मन्ना है की आप शहर को अपने नज़रिए से बेहतर समझते हैं, आपकी समझ हमारे संगठन लिए फायदेमंद होगी l कार्यक्रम में शामिल हो कर बेहतर समाज की परिकल्पना को साकार करने में अपना योगदान दें ल
मै अपने भाई अफाक की बात आप सभी तक पहुँचने की कोशिश कर रहा हूँ अगर ऐसा प्रयास आप भी करें तो हम सभी को लगेगा की हमारी मेहनत सफलता की राह पर है और अगर हमारी कहीं मदद की ज़रूरत पड़े तो हम अपने आपको सौभाग्यशाली समझेंगे आप हमें (ghufran.j@gmail.com) पर संपर्क कर सकते हैं.....भाई अफाक की तरफ से मै गुफरान........
Thursday, October 30, 2008
दलों का दलदल.....
खास नही कोई सब हैं आम
जात पात धर्म हैं इनके हथियार
लडाई दंगे बदले की ये करते बात
बहुतेरे रंग में रंगी इन सबकी जात
देख कर इनको गिरगिट को आती लाज
भूल गए ये रोटी कपड़ा मकान की बात
भूल गए ये जनता के सम्मान की बात
शिक्षा शान्ति रोजगार इनको नही भाता
रिश्तों के नाम आर इनके न जोरू न जाता
बढाते टैक्स लगाते वैट करके विकास की बात
बदले में देते हमको महगाई स्मारक पार्क की सवगात