Thursday, January 7, 2010

देश के दाद खाज !!!!!!!!!!!!!!


काफी दिनों के बाद कुछ लिख रहा हूँ इसके लिए क्षमा चाहूँगा अभी हल ही में पेट्रोलियम राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने एक व्यक्तव्य दिया की २५ रुपये अधिक दीजिये और रसोई गैस आपके घर आसानी से पहुँच जाएगी ये सुविधा अभी महानगरों में शुरू करने जा रहे हैं कुछ बोलने से पहले ये बता दूँ की ये महाशय भी परिवार की राजनीती से जन्मे हैं जैसा की कांग्रेस का इतिहास रहा है की राजनीती यहाँ व्यवसाय है उसी के चलते अपने पिता से विरासत में मिली लोकसभा सीट से संसद बने और अब केंद्र में मंत्री हैं यूँ कहने को तो ये राहुल गाँधी के युवा ब्रिगेड के सिपाही हैं जो देश की दशा और दिशा सुधरने आयें हैं.
लेकिन इन महाशय को ये पता ही नहीं की करोड़ों लोग अभी भी बिना चूल्हा जलाये एक टाइम खा कर जिंदा है और जिनको गैस की ज़रूरत है वो बेचारे अँधेरे मुह ही ५ रुपये बचाने के लिए लाइन में लग जाते हैं और इस कपकपाती ठण्ड में जहाँ जितिन प्रसाद जी सरकारी खर्च पर ब्लोवर की गर्मी में सोते हैं वहीँ आम आदमी अपनी नींद हराम करके २-३ घंटे लाइन में रह कर गैस लेता है वो धक्के मुक्के खाता हुआ गैस लेता है और ऊपर से कालाबाजारी भी झेलता है लेकिन अब कांग्रेस की दलाली को आगे बढ़ाते हुए ये जनाब भी आम आदमी की जेब हलकी करने जा रहे हैं जब २५ रुपये और खर्च करके आसानी से गैस मिल जाएगी तो कालाबाजारी भी बढ़ेगी अब २५ को ५० बनाने में और आसानी हो जाएगी आखिर सरकार की मुहर जो लग जाएगी कहने को तो एम.बी.ए. के डिग्री धारक और पूर्व सरकार में स्टील मंत्री रह चुके हैं लेकिन अब वो भी खिलाडी बन गए हैं वो हैं तो एग्रिकल्चरिस्ट और शाहजहांपुर के रहने वाले हैं लेकिन उनका नया पता अब दिल्ली है ये महाशय बेल्जियम, जर्मनी,सिंगापुर,यू.के,समेत अमरीका की भी सैर कर चुके हैं लेकिन देश के किस किस राज्य या जिले में गए ये नहीं पता और तो और इनके शौक भी नवाबी हैं
तो क्या हम ये मान के चले की आस्मां छूती महंगाई और केरोसीन की कालाबाजारी के बीच अब उपभोक्ता गैस की सरकारी काला बाजारी के लिए भी तैयार रहें आखिर क्यूँ नहीं ये समझते की जो सरकारी निजाम चल रहा है उसी को चुस्त और दुरुस्त करके जनता को लाभ पहुचाया जा सकता है अगर यही राहुल की युवा ब्रिगेड की खोज है तो राहुल जी ये खोज नहीं देश के लिए खाज हैं और आप भी दाद बनते जा रहे हैं ऐसा न हो की एक बार फिर से क्रांति हो पिछली बार तो सत्ता नेहरु-गाँधी परिवार में ही थी लेकिन इस बार ये नाम ही नहीं बचे.....
आपका हमवतन भाई गुफरान (अवध पीपुल्स फोरम अयोध्या फैजाबाद)

Monday, December 7, 2009

माया के किले में युवराज की सेंध


कल कांग्रेस के युवराज अम्बेडकर नगर (अकबरपुर) के दौरे पर आ रहे हैं यहाँ हम फिर से ऐसे किसी विवाद के लिए तैयार हैं जब वो किसी दलित के घर अपनी प्यास या भूक मिटाने जा सकते हैं और साथ ही राजनितिक पार्टिओं में बयान बाजी शुरू हो सकती है और मीडिया को खेलने के लिए एक मुद्दा मिलेगा और पूरा दिन इसी सब में निकल जायेगा लेकिन जनता से जुडी गंभीर खबर से हम सब महरूम रहेंगे.कल जब राहुल गाँधी अम्बेडकर नगर आएंगे तो एक तीर से कई निशाने साधने का प्रयास रहेगा एक तो ये जिला उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमों मायावती का जिला कहा जाता है जहाँ से वो कई बार सांसद रह चुकी हैं और यहाँ की पांचो विधानसभा सीटों पर बा.स.पा. कब्ज़ा है और पिछले लोक सभा चुनाव में स.पा. से इस लोक सभा सीट को भी छीन कर पुरे जिले में अपनी बादशाहत कायम कर ली.

सभी जानते हैं की इसी जिले से पूर्वांचल में बा.स.पा.ने अपनी धमक जमाई थी या यूँ कहें की ये बहुजन समाज पार्टी का एक मज़बूत किला है जिसमे सेंध मारी करने के पूरे मूड में होंगे राहुल गाँधी.उनकी मंशा होगी की यहाँ से जो आग लगे उसकी आंच सीधे 5 काली दास मार्ग को अपनी तपिश के आगोश में ले ले.और किसी न किसी तरह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को ऐसी बयानबाज़ी के लिए उकसाया जाय जिसके सीधे निशाने पर राहुल गाँधी हों. इसमें उत्तर प्रदेश शासन की फ़िज़ूल खर्ची और दलितों पर इस शासन काल में हुए उत्पीडन का प्रमुखता से जिक्र होगा और यहाँ मुस्लिम आबादी होने के नाते समाजवादी पार्टी पर भी भरपूर प्रहार की उम्मीद की जा सकती है.यहाँ बुनकरों की समस्याओं को भी एक हथियार के रूप में इस्तिमाल किया जा सकता है और अम्बेडकरनगर का पिछड़ापन आग में घी का काम करेगा कुल मिला कर कल का दिन सभी समाचार माध्यमो के लिए अच्छा गुजरेगा अभी ६ दिसंबर की खुमारी ख़त्म भी नहीं हुई थी की राहुल गाँधी का अम्बेडकर नगर दौरा मिल गया नहीं तो पता नहीं कहाँ कहाँ भटकना पड़ता ख़बरों के लिए.
लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता से अगर कांग्रेस युवराज को बहोत सी उम्मीदें हैं तो शायद आने वाले विधान सभा चुनाओं में उसका जवाब भी उनको मिल जायेगा हम बात कर रहे हैं आम भारतीओं की और जब उत्तर प्रदेश की बात हो रही है तो हम बात करते हैं उत्तर भारतीओं की क्या राहुल जवाब देंगे की महाराष्ट्र में राज की गुंडा गर्दी क्यों नहीं रोकी जा रही है ? क्या वो जवाब देंगे की विकास की कितनी कीमत और चुकानी होगी गरीब जनता को ? क्या वो जवाब देंगे की विकास दर बढ़ाने के लिए करोंड़ों घरों का बजट उलट पलट कर क्यों रख दिया ? क्या वो जवाब देंगे की आज देश विकास के रास्ते आगे बढ़ रहा है या महंगाई भूक बदहाली कुपोषण की गिरफ्त में जा रहा है ?

अब निश्चित ही उत्तर प्रदेश तैयार हो रहा है जवाब देने के लिए अपने ऊपर किये गए हर ज़ुल्म का चाहे भा.जा.पा. की 'लड़ाओ और राज करो' की निति हो या 'स.पा. की डराओ और राज करो' की निति हो या 'बा.स.पा. की बांटों और राज करो' की निति इन सब से जनता ने सबक ले लिया है और रही बात कांग्रेस की तो 'लड़ाओ,डराओ,बांटो' की राजनीती अंग्रेजों से सीख कर ही आजाद भारत पर सबसे ज्यादा समय तक राज किया है और बाद में सभी क्षेत्रीय दलों ने इनमे से एक एक सबक आपस में बाँट लिया.अगर किसी को साफ़ दिखाई नहीं देता तो वो धुंधली आँखों से ही देख ले की इस बार फिर से सभी राजनितिक दलों को सरकार बनाने के लिए लोहे के चने चबाने पड़ेंगे.

Wednesday, November 25, 2009

अयोध्या 'सड़ी दाल में घी का तड़का'

बाबरी मस्जिद

इतनी हाय तोबा मचाने की ज़रूरत नहीं है जो होना था हो चूका है उसके बाद खून की गर्मी निकालने वाले गर्मी भी निकाल चुके हैं कानून बघारने वाले कानून बघार चुके हैं और नोट कमाने वाले नोट कमा रहे हैं वोट कमाने वाले वोट कमा रहे हैं रही बात मस्जिद या मंदिर की तो जब ईमान ही यहाँ मुर्दा है तो खुदा के घरों के होने या न होने की बात कोई मायने नहीं रखती 'मरी इंसानियत' को ढोते-ढोते हम बच्चे से जवान हो गए अब इतने सालों बाद फिर से वही खेल शुरू हुवा शायद अबकी बार हमारे जवानी के कंधे इसको बुढ़ापे तक ढोएंगे क्या करें आदत सी पड़ चुकी है जस्टिस लिब्राहन तो बेचारे फुटबाल बन गए मार्च १९९२ से लेकर अब तक जो भी सत्ता में आया अपने हिसाब से किक करता रहा है और अब देखिये बेचारे की ऐसी किरकिरी हुई की पूरी तरह से बुढ़ापा ख़राब हो गया लोग सवाल करते हैं की १६ साल ये जांच क्यूँ चली लेकिन किसी ने जाँच की रिपोर्ट जो ३ महीनो में देनी थी जब पूरी नहीं हुई तो सरकार से सवाल क्यूँ नहीं किया क्यूँ पंजे वाली सरकार को कटघरे में नहीं खड़ा किया या उसके बाद कमल वालों को क्यूँ नहीं जाँच पूरी करने के लिए बोले सीधी सी बात है हर कोई अपनी अपनी रोटियां सेंक रहा था अब जब सब कुछ भुला कर लोग फिर से देश और विकास की बात करने लगे हैं तो फिर से वही सब शुरू किया जा रहा है और इसको शुरू करने में देश को खोखला करने वाले सबसे बड़े दल ने फिर से पहेल की है जब रिपोर्ट मिल चुकी थी तो उसको संसद में पेश करने के बजाये हमेशा की तरह संसद के बाहर ही बहस शुरू कर दी इसके पीछे क्या है किसी से छुपा नहीं अब देखना है की अयोध्या को फिर से अशांत करने की कोशिश कितना रंग लाती है और मुर्दा हो चुके तथाकथित देशभक्त संगठनों को संजीवनी देने वाला ये काम देश को फिर से कितने पीछे धकेलता है कितने घोटाले इसके पीछे दबे रह जायेंगे कितने भ्रष्टाचारी आसानी से जनता की आँखों के सामने से निकल जायेंगे लेकिन हमें इनसे क्या मतलब हमको फिर से मौका जो मिलेगा अपनी अपनी रोटियां सेंकने का,
यहाँ कौन नहीं जनता की न मंदिर बनने वाला है न ही मस्जिद क्यूंकि जैसे ही इनमे से कुछ भी बना सब पहले जैसा हो जायेगा और इन राजनितिक दलों के चकलाघरों में चढ़ावा आना बंद हो जायेगा ये ऐसा कभी नहीं होने देंगे बस सवा अरब आबादी में से चंद हज़ार इनके दिखाए रास्ते पर चलके कटते मरते रहेंगे और पूरे देश को अशांत किये रहेंगे.........,
क्या कोई ये भी जानना चाहेगा की अयोध्या को क्या चाहिए क्या किसी ने अयोध्या के मर्म को भी समझने की कोशिश की है क्या आस्था के नाम पर धर्म को पैरों तले रौंदती ये अंधों की भीड़ कभी ये समझ पायेगी की उसने शांत,शीतल, पवित्र अयोध्या को पूरे संसार में किस रूप में प्रचारित कर दिया है अपने ही देश में अपने ही लोगों के बीच अयोध्या असुरक्षित सी है सिसकती सी डरी सहमी सी अयोध्या अपनों के लहू से लहू-लुहान अपनों के दिए ज़ख्मो को नासूर बनते ख़ामोशी से देख रही है आखिर अपनी व्यथा सुनाये भी तो किसको यहाँ तो हर तरफ व्यापारी घूम रहे हैं जिनका धर्म बस एक है धन और सिर्फ धन.......शायद अब पहेल करने की बारी हम सभी की है अयोध्या को इन व्यापारियों से आजाद कराने की......

आपका हमवतन भाई ...गुफरान सिद्दीकी (अवध पीपुल्स फोरम अयोध्या,फैजाबाद)

Saturday, November 21, 2009

बड़े बेआबरू होकर इस कुचे से हम निकलें......


मुलायम मुलायम हो गए साईकिल का कल्याण होते होते अस्थि पंजर ही ढीले हो गए कभी लोग कहते थे की सपा मुलायम है , फिर बोले सपा अमर है फिर सुना की सपा का कल्याण हो गया, अब राज के चक्कर में किरकिरी के बाद फिर पुराने ढर्रे पर आने की कोशिश शुरू हो रही है, और कमल वाले विनय का अनुनय शुरू हो चूका है की अब हमारा भी कल्याण कर दो अब देखना ये बाकी है की पहले जैसे कमल को कीचड़ से निकाल कर कल्याण करते हैं या फिर सपा का सूपड़ा साफ़ होते ही कल्याण को खुद कल्याण की ज़रूरत पड़ती है,जहाँ तक साईकिल वाली फैक्ट्री के नए कर्ता-धर्ता की बात है तो अखिलेश के डिम्पल गायब हो चुके हैं और उनकी फैक्ट्री को अब इंधन की ज़रूरत है जो अब मिलने की सम्भावना कम ही दिखती है वजह साफ़ है साईकिल फैक्ट्री को इंधन सप्लाई करने वाले जो भी थे उनमे से ज्यादा तर हाथी पर घूम रहे हैं और दो बड़े सप्लायर दिल्ली वाली मैडम जी को इंधन सप्लाई कर रहे हैं जहाँ तक रामपुर वाले की बात है तो उन्होंने सप्लाई की लाइन ही काट रक्खी है और बाकी का काम 'दस जनपथ' वाले युवराज ने कर दिया ऐसा पंजा जमाया की अब उसको हिलाना ही मुश्किल हो रहा है तो सवाल ये उठता है की अब जब साईकिल वाली फैक्ट्री के घर के प्रोडक्ट जनता ने नकार दिए हैं तो अब साईकिल को खरीदेगा कौन ॥?जहाँ तक कमल की बात है तो जब तक ये अटल थे तब तक तो ठीक रहा लेकिन फिर इनके लाल ने सीमा पार से जिन्न को बहार निकाल लिया उससे पीछा छुटा तो उमा ने लपेट लिया उससे छुटकारा मिला तो स्वराज ने चिंता बढ़ा दी उधर शेखावत जी अलग उलझाये हुए थे इन सबसे किसी तरह छुटकारा मिला तो यश का जिन्न बहार आ गया उससे निपटे तो राजे के तेवर गरम हो चुके थे कुल मिला कर राज के तो जैसे नाथ ही रूठ गए हो, अब देखना है की मुलायम की फैक्ट्री कौन सा अजूबा निकाल कर लाती है जिससे की पुराने ग्राहक फिर से वापस आ जाये.....
अवध पीपुल्स फॉरम (अयोध्या ,फैजाबाद)

Sunday, October 25, 2009

युवा शक्ति.....या सिर्फ़ इंधन...


आखिर है क्या ये युवा शक्ति आज़ादी के बाद से ही ये नारा राजनितिक दलों का मुख्या अस्त्र रहा है आज़ादी की लडाई में युवा वर्ग के योगदान को कोई महत्त्व नहीं दिया गया आज़ादी की लडाई का सारा श्रेय लेने वाले आज देश के प्रमुख रानीतिक घराने हैं आखिर देखते देखते ऐसा क्या हुवा की आज युवा ह्रदय सम्राट, युवराज के संबोधन में सुसज्जित राजनितिक पार्टी प्रमुख के पुत्र पुत्रियाँ जनता के बीच अपना जलवा बनाने में लगे हैं क्यूँ आज युवा वर्ग को इतना महत्त्व दिया जा रहा है जबकि आज़ादी के बाद से ही हाशिये पर डाल दिया गया ये वर्ग देश का सबसे उपेक्षित वर्ग रहा है राजनितिक दलों की जो मंशा रही और उन्होंने जो दुष्प्रचार किया उसका पूरा श्रेय मीडिया को ही जाता है जनसँख्या विस्फोट को औजार की तरह इस्तेमाल किया गया संसाधनों की कमी का रोना रोया गया और आम देशवासी अपने आप को कोसता रहा की इतने बच्चे क्यों पैदा किये अब क्या कर सकते हैं कमी हमारी ही रही सरकार इसमें क्या कर सकती है लेकिन सरकार चलाने वाले राजनितिक दलों से लेकर नौकरशाहों तक के राजसी ठाठ बाट की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया और जिसका गया भी तो उसका मुह या तो भर दिया गया या बंद कर दिया गया इसके बहोत से उदाहरण है. युवा वर्ग ने जब भी अपनी उपेक्षा का विरोध किया उसको इस तरह कुचला गया की वो आज अपनी हक की लडाई लड़ने से ही कतराने लगा उसका परिणाम ये निकला की इस युवा शक्ति का फायदा ऐसे राजनितिक दलों ने उठाना शुरू किया जो धर्म जाती और क्षेत्रवाद के नाम पर आम लोगों का खून चूस रहे थे और सरकार में ऐसे लोगों को ख़ास की पदवी दी गयी थी लेकिन देखते ही देखते ये स्थिति विस्फोटक हो गयी और अब सरकार इसके सफाए का प्रयास कर रही है लेकिन इस समस्या की मूल जड़ अपनी जगह बरक़रार है भारत जैसे देश में संसाधनों का रोना रोने वाले खरबों में घोटाला करते हैं कोई प्रदेश का आधा बजट खा जाता है तो कोई नोटों पर सोता है और इसके बाद भी अगर युवा वर्ग के लिए सरकार के पास कुछ भी नहीं है तो राजनितिक दल उनसे ये उम्मीद क्यूँ पाले हुए हैं की वो उनके पक्ष में लामबंद होंगे.बात राहुल गाँधी की हो या किसी की भी सिर्फ दलित या गरीब के घर रात बिताने से या उनके घर खाना खाने को भले ही रानीति नहीं समाजसेवा प्रायोजित किया जाता हो लेकिन उसकी चर्चा जिस तरह पुरे देश में कराइ जाती है उससे काफी हद तक तस्वीर साफ़ हो जाती है की ये लोग आज भी देश के युवा वर्ग को अपनी पार्टी के इंधन से ज्यादा कोई महत्व नहीं देते हैं.अगर देते तो आज राहुल गाँधी की जगह कोई गैर नेहरु होता या अखिलेश की जगह कोई गैर यादव होता. लेकिन हम भी अब तैयार है इनके मुह पर जूता मारने के लिए अब देश का आम युवा ही कल का भविष्य होगा ............जय हिंद.

आपका हमवतन भाई ...गुफरान सिद्दीकी (अवध पीपुल्स फोरम फैजाबाद,अयोध्या)

Thursday, October 15, 2009

अंधकार का दीपोत्सव..प्रकाश




शुभ दीपावली
आइये हम सभी मिल कर इस दीपावली में हर उस घर में दिया जलाएं जहाँ सदिओं से अँधेरा है ये एक प्रयास होगा अंधेरों में रहने वाले उन मासूमों के लिए जिनकी तरफ जवाबदेही से हम बचते रहते हैं लेकिन कब तक बचेंगे ये कोई नहीं जानता.आज हर कोई दीपोत्सव के प्रकाश में सब कुछ भूल जाना चाहता है पर वास्तव प्रकाश कुछ देर के लिए ही होता है और फिर अंधकार हम सभी को अपने आगोश में लेने के लिए मचलने लगता है. मै हमेशा सोचता था की दिवाली वास्तव में उस अंधकार पर विजय का त्यौहार है जिस पर हमेशा के लिए विजय हो चुकी है लेकिन अब देखता हूँ तो वही अंधकार हर दिशा में फैलता जा रहा है और हम अपनी आंखे बंद करके ये सोचते हैं की अभी प्रकाश बाकि है लेकिन जो जा रहा है उसको बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं करते शायद हम कल नहीं देख रहे हैं आने वाला वक़्त जब हमसे प्रश्न करेगा तब हम क्या उत्तर देंगे ये सोचना कोई नहीं चाहता.लेकिन जवाबदेही तो सभी की है.क्या ये नहीं हो सकता की हम इस अंधकार में जी रहे उन मासूमो को रौशनी दिखाने का प्रयास करें जिनके लिए शिक्षा का कोई महत्त्व नहीं या यूँ कहें की वो शिक्षा के महत्व को ही नहीं जानते अगर ऐसा है तो ये ज़िम्मेदारी हमसभी की है की उनको शिक्षित करने के लिए जो भी हो सकता है अपने स्टार से ज़रूर करें शायद यही हम सभी सच्ची दिवाली होगी !
आप सभी को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनायें !
आपका हमवतन भाई ..गुफरान सिद्दीकी (अवध पीपुल्स फोरम फैजाबाद)