Wednesday, November 25, 2009

अयोध्या 'सड़ी दाल में घी का तड़का'

बाबरी मस्जिद

इतनी हाय तोबा मचाने की ज़रूरत नहीं है जो होना था हो चूका है उसके बाद खून की गर्मी निकालने वाले गर्मी भी निकाल चुके हैं कानून बघारने वाले कानून बघार चुके हैं और नोट कमाने वाले नोट कमा रहे हैं वोट कमाने वाले वोट कमा रहे हैं रही बात मस्जिद या मंदिर की तो जब ईमान ही यहाँ मुर्दा है तो खुदा के घरों के होने या न होने की बात कोई मायने नहीं रखती 'मरी इंसानियत' को ढोते-ढोते हम बच्चे से जवान हो गए अब इतने सालों बाद फिर से वही खेल शुरू हुवा शायद अबकी बार हमारे जवानी के कंधे इसको बुढ़ापे तक ढोएंगे क्या करें आदत सी पड़ चुकी है जस्टिस लिब्राहन तो बेचारे फुटबाल बन गए मार्च १९९२ से लेकर अब तक जो भी सत्ता में आया अपने हिसाब से किक करता रहा है और अब देखिये बेचारे की ऐसी किरकिरी हुई की पूरी तरह से बुढ़ापा ख़राब हो गया लोग सवाल करते हैं की १६ साल ये जांच क्यूँ चली लेकिन किसी ने जाँच की रिपोर्ट जो ३ महीनो में देनी थी जब पूरी नहीं हुई तो सरकार से सवाल क्यूँ नहीं किया क्यूँ पंजे वाली सरकार को कटघरे में नहीं खड़ा किया या उसके बाद कमल वालों को क्यूँ नहीं जाँच पूरी करने के लिए बोले सीधी सी बात है हर कोई अपनी अपनी रोटियां सेंक रहा था अब जब सब कुछ भुला कर लोग फिर से देश और विकास की बात करने लगे हैं तो फिर से वही सब शुरू किया जा रहा है और इसको शुरू करने में देश को खोखला करने वाले सबसे बड़े दल ने फिर से पहेल की है जब रिपोर्ट मिल चुकी थी तो उसको संसद में पेश करने के बजाये हमेशा की तरह संसद के बाहर ही बहस शुरू कर दी इसके पीछे क्या है किसी से छुपा नहीं अब देखना है की अयोध्या को फिर से अशांत करने की कोशिश कितना रंग लाती है और मुर्दा हो चुके तथाकथित देशभक्त संगठनों को संजीवनी देने वाला ये काम देश को फिर से कितने पीछे धकेलता है कितने घोटाले इसके पीछे दबे रह जायेंगे कितने भ्रष्टाचारी आसानी से जनता की आँखों के सामने से निकल जायेंगे लेकिन हमें इनसे क्या मतलब हमको फिर से मौका जो मिलेगा अपनी अपनी रोटियां सेंकने का,
यहाँ कौन नहीं जनता की न मंदिर बनने वाला है न ही मस्जिद क्यूंकि जैसे ही इनमे से कुछ भी बना सब पहले जैसा हो जायेगा और इन राजनितिक दलों के चकलाघरों में चढ़ावा आना बंद हो जायेगा ये ऐसा कभी नहीं होने देंगे बस सवा अरब आबादी में से चंद हज़ार इनके दिखाए रास्ते पर चलके कटते मरते रहेंगे और पूरे देश को अशांत किये रहेंगे.........,
क्या कोई ये भी जानना चाहेगा की अयोध्या को क्या चाहिए क्या किसी ने अयोध्या के मर्म को भी समझने की कोशिश की है क्या आस्था के नाम पर धर्म को पैरों तले रौंदती ये अंधों की भीड़ कभी ये समझ पायेगी की उसने शांत,शीतल, पवित्र अयोध्या को पूरे संसार में किस रूप में प्रचारित कर दिया है अपने ही देश में अपने ही लोगों के बीच अयोध्या असुरक्षित सी है सिसकती सी डरी सहमी सी अयोध्या अपनों के लहू से लहू-लुहान अपनों के दिए ज़ख्मो को नासूर बनते ख़ामोशी से देख रही है आखिर अपनी व्यथा सुनाये भी तो किसको यहाँ तो हर तरफ व्यापारी घूम रहे हैं जिनका धर्म बस एक है धन और सिर्फ धन.......शायद अब पहेल करने की बारी हम सभी की है अयोध्या को इन व्यापारियों से आजाद कराने की......

आपका हमवतन भाई ...गुफरान सिद्दीकी (अवध पीपुल्स फोरम अयोध्या,फैजाबाद)

12 comments:

अफ़लातून said...

क्या यह भूल जाने वाली बात है ? उन्माद और फिरकापरस्ती पूरे देश में फैलायी गयी , फिर सिर्फ़ अयोध्यावासियों की राय से क्या होगा। जो भी राय हो वह पूरे देश की बने ।

Anonymous said...

KUCH MUSLIM SE AAPKI SOCH BEHTAR HAI
APKI YAH LAIN BHOT ACHHI LAGI APKA HAMVATAN BHAI

Rajey Sha said...

Lekh me sabkuchh Aaapne haqikat ke kafi kareeb likha hai, sabko padna chahiye...
आपका हमवतन भाई ...गुफरान सिद्दीकी
Aapka hamwatan bhai... ye likhe bagair seedhey "Gufran Siddique" bhi likha ja sakta tha.
Is se jahir hota hai ki aap "bhai chara hai nahi" "bhai chara paida karne" ki koshish kar rahen hain. Insaano ke liye to Gufran Siddique hi sahi naam hai.
Aur jinke liye aap ne "ham watan bhai" likha hai unke dil tak to aapki baat pahunchne se rahi!!

गुफरान सिद्दीकी said...

राजे भाई मै सहमत हूँ आपसे लेकिन मेरा काम है ऐसे लोगों को जागते रहना जब तक उनकी सोच न बदल जाये आपकी हौसल अफजाई का शुक्रिया...
अफलातून जी मै मानता हूँ की जो भी राय हो पूरे की होनी चाहिए लेकिन अयोध्यावासियों की राय को प्रमुखता से स्थान देना होगा इसकी वजह बताने की ज़रूरत नहीं घर का मसला सुलझाने की शुरुआत घर से ही तो बेहतर होगा.....आपके प्यार आशीर्वाद का शुक्रिया.

devashish said...

yaar tumhara lekh wakai mian hum sabke marm ko jhak jhor dia hai main poori tarah tumse sahmat hoon aapki is raah par main hamesha aapke saath hoon

Suman said...

ghufraan bhai ,
namaskaar,

aap apna mobile no. va postal address turant email karne ka kast karein.jisse patrika aap ko bheji ja sake.

suman
loksangharsha@gmail.com

shivesh said...

wah yahan aapne sirf hindu ya musalman hokar nahi likha balki insan pada likha insan hokar likha aapki lekni tareef ke kabil hai.
shivesh shrivastava
www.shivvani.blogspot.com

sunil parbhakar said...

kya baat hai kya likha hai maja gya bhai jaan

ANAND PANDEY said...

bhai aapki baat padhkar aankh me aansu aa gaye....

rah rah kar ek hi baat jubaan par aati hai
hamne aajaadi ki ladaai to saath hi ladi thi na
fir ab kya ho gaya

desh ko ek karne ke liye jo bhi hath uthega uske neeche sahaara bankar khada hounga... ye sapath hai

JAI HIND

गुफरान सिद्दीकी said...

shivesh ji , suneel ji bhai anand hausla afzai ka shuqriya ye sirf lekh nahi wastav me AYODHYA ki awaz hai jo awam tak sabhi ko pahunchani hogi..

Syed Ali Akhtar said...

Gufran ji,Prayas accha hai,Hum aur aap bairozgar sahi lekin dharti per bojh to nahien.


Syed Ali Akhtar
Yuva Koshish

कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said...

GUFRAN BHAI ,AAP JAISE AADHUNIK VICHARON KE LOGON KI VAJAH SE AB TAK ''HINDUSTAN BIKA NAHI ...BADHAYEE ISI JAZBE KO MERA SALAM....